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15492493_1155602637894236_5281643528867117348_nमाताजी यह झूठा प्रचार है कि पहले बच्चे डिलीवरी के समय मर जाते थे तो फिर आज किसी भी घर में दो से ज्यादा बच्चे क्यों नहीं दिखाई देते ।
किंतु यह भी सत्य है कि करोड़ों की संख्या में आज इन आधुनिक पढ़े-लिखे तथाकथित सभ्य लोगों द्वारा बच्चे पेट में ही मार दिए जाते हैं ।
मृत्यु कि दर बड़ी है घटी नहीं ,कई गुना बढ़ी है।
इतना घिनौना काम तो जानवर भी नहीं करते यह सब समाज के लिए एक बड़े शर्म की बात है ।
यदि जीवन को संतुलित किया जाए तो बच्चे जनना एक स्वभाविक किया है ,किंतु अब यह बहुत डरावनी बनी हुई है ।
इस आधुनिक जीवन शैली के कारण सारे काम बैठे-बैठे हो जाएं ,आज तो लोगों को भोजन चबाने में भी कष्ट लगता है इसकी भी सबसे substitute टैबलेट खाना चाहते हैं।
आवश्यकता है जीवन को संतुलित करने की बैलेंस करने की आधुनिकता के इस प्रभाव में बहकर समाज अपनी तकलीफों को और ज्यादा बढ़ा रहा है।
श्रील प्रभुपाद ने बतलाया सादा जीवन एवं भगवान की भक्ति के द्वारा हम सब सुखी रह सकते हैं

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