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श्रीला प्रभुपाद ने कहा की श्री हनुमानजी बहुत चतुर है अतः वे सिर्फ भगवान राम के नाम रूपी धन को ही जमा करते हैं ।इस प्रपंच का धन कांच के टुकड़ों जैसा है जबकी भगवान के दिव्य नाम रूपी धन वास्तविक रत्न है मणि के समान है।
अतः मीराबाई कहती है ,
“पायोजी मैंने राम रतन धन पायो
” कांच के टुकड़ों को जितनी तीव्रता और कठोरता से पकड़ेंगे हाथ उतने ही ज्यादा कटेंगेँ । इस कारण से इस संसार में आसक्त व्यक्ति को अंत में सर पटक-पटक करके रोना ही पड़ेगा ।
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जिस प्रकार भारत के रुपए अमेरिका में काम नहीं ,आते,” वहां आपको इन्हें बदलकर डालर लेने पड़ेंगे, तभी कुछ लाभ होगा उसी प्रकार इस संसार का कोई भी धन वैकुंठ लोको में काम नहीं आता, अतः बुद्धिमान व्यक्ति इस धन को वहां के धन से बदलना जानते हैं।
श्रील नरोत्तम दास ठाकुर ने गाया
“गोलोके र प्रेम धन हरि नाम संकीर्तन’
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गोलोक का धन तो भगवान के दिव्य नामों का कीर्तन एवं जप है अतः चतुर व्यक्ति इस संसार के धन रुपयों एवं सोने को नहीं वरना भगवान के नाम को जमा करते हैं ।इस संसार की सारी अनित्य संपत्ति को खर्च करके भगवान के दिव्य नाम जप की नित्य संपत्ति को जमा करना ही समझदारी है।
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आपका विनम्र सेवक महाश्रृंग दास डायरेक्टर इसकँन नाम हट कुकटपल्ली
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